तन्हाई

तेरे बिना तन्हा  गुज़र जायेगा ये साल भी , जैसे आखे नम  करते करते काट दिया हमने बीता हुआ साल भी ...बस इस उम्मीद में की  साथ रहेगी तो सिर्फ तेरी  यादे , वो परछाई जो बीते हुए साल भी मेरी थी और आने वाले साल भी मेरी रहेंगी । तेरी कमी कभी कभी महसूस तो होती है पर अब आदत सी हो गयी है इन्हे महसूस करने की ,ये भी पता है मुझे कि  हर समय ,हर कदम पर तेरी कमी महसूस होगी , थोड़ा मुश्किल सा लगता है तेरे बिना जीना पर खुद पर भरोसा है जी लूंगा तेरे बैगैर तेरे होने न होने से ज्यादे फर्क  पड़ता मगर हा एक तकलीफ आज भी है और शायद हमेशा रहेगी । ..........  

Comments

Popular posts from this blog

अमृता का इश्क जिसे साहिर ने खूबसूरत मोड़ पर छोड़ दिया, फिर आए इमरोज

मां के कफ़न खातिर बिलखते मासूमों का दर्द कैसे बयां किया जाये

कौन कितना बदलेगा ?