फीफा जैसे मंच पर आकर क्यों फ्लॉप हो जाता है मेस्सी मैजिक...?

मौजूदा समय में फुटबॉल जगत में सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल यह है कि आखिर क्यों लियोनल मेस्सी बार्सीलोना के लिए खेलते हुए गोल्स की झड़ी लगा देता है, लेकिन जब यह दिग्गज अपनी राष्ट्रिय टीम के लिए खेलता है तो बेरंग नज़र आने लगता है. इसकी एक वजह यह भी है कि शायद यह मैजिसियन अपेक्षाओं के बोझ तले कहीं दब जाता है. लेकिन एक सवाल यह भी है कि क्या अर्जेंटीना के लिए खेलते हुए मेस्सी अपना शत प्रतिशत देने की कोशिश करते हैं?

मेस्सी जिसे अर्जेंटीना में माराडोना का उत्तराधिकारी माना जाता है. वह उस जज्बात के साथ नहीं खेलते जैसा माराडोना खेला करते थे. उनकी शालीनता उनकी नेतृत्व क्षमता को ढक लेती है. दबाव में बिखरने की हजार वजहें हैं और मेसी के पास उससे निपटने का सिर्फ एक तरीका है अपनी प्रतिभा. क्वालीफायर में उनकी प्रतिभा ही थी जो अर्जेंटीना को खींचकर विश्व कप तक लाई. लेकिन क्रोएशिया के खिलाफ उन पर दबाव भारी पड़ा. और इसकी शुरुआत शायद आइसलैंड के खिलाफ पेनाल्टी मिस करने के दौरान ही हो गई थी. मेस्सी अर्जेंटीना के फुटबॉल के मसीहा हैं और मसीहा से चमत्कार की उम्मीद होती है, बचाव की नहीं. मेसी इस उम्मीद पर खरे नहीं उतरे.



यह भी एक कारण हो सकता है.




मेस्सी अर्जेंटीना में जन्मा ज़रूर है और उसकी राष्ट्रीय टीम में खेलता है, लेकिन वो प्रथमतया बार्सीलोना का खिलाड़ी है. बचपन में ग्रोथ डिसऑर्डर से ग्रस्त रहे मेस्सी का भाग्योदय तभी हुआ था, जब बार्सीलोना की यूथ एकेडमी “ला मसीया” ने उसे अपनाया था. वहीं मेस्सी का इलाज कराया गया और प्रशिक्षण भी दिया गया. सबसे पहले उसने बार्सीलोना के लिए ही फ़ुटबॉल खेली. वहां उसकी क़ामयाबी के बाद उसे राष्ट्रीय टीम में स्थान दिया गया, इसका उल्टा नहीं हुआ था.

बार्सीलोना के प्रति मेस्सी की निष्ठा का आलम यह है कि वो एक समय अर्जेंटीना की राष्ट्रीयता त्यागकर स्पेन की नागरिकता लेने पर भी विचार कर चुका है. वर्ष 2010 में जिस स्पैनिश टीम ने विश्वकप जीता, वह बार्सीलोना के उन खिलाड़ियों से भरी हुई थी, जो क्लब स्तर पर मेस्सी के इर्द गिर्द खेलते थे. मेस्सी को बराबर यह लगता रहा कि जब हर हफ़्ते उसके साथ खेलने वाले खिलाड़ी विश्वविजेता कहला सकते हैं, तो वो ही क्यों इससे वंचित रहे. किंतु वो अर्जेंटीना को नहीं त्याग सका.

वर्ष 2004 में जब मे‍स्सी ने बार्सीलोना के लिए खेलना शुरू किया, तब यह क्लब ब्राज़ीली सितारे रोनाल्डिनियो का दबदबा था. ख़ुद मेस्सी भी शुरू में उनके प्रभाव में रहा, लेकिन पेप गार्डिओला जैसे कुशल कोच के मार्गदर्शन में और चावी-इनिएस्ता की मिडफ़ील्ड जोड़ी के सहयोग से मेस्सी ने खुद अपना एक अलग मुकाम स्थापित कर लिया. मेस्सी का यह वर्चस्व आज तक बरकरार है. इनकी वेबसाइट पर जब आप जायेंगे तो आपको अर्जेंटीना के अपेक्षा बार्सीलोना के बारे में ज्यादा कुछ लिखा हुआ मिल जाएगा. जो दर्शाता है कि मेस्सी की रसूख इस क्लब में क्या है.



फ़ुटबॉल तालमेल का खेल है जिसमें मेस्सी माहिर हैं


मैनचेस्टर यूनाइटेड के पूर्व मैनेजर सर एलेक्स फ़र्ग्युसन ने कहा था कि क्रिस्तियानो रोनाल्डो दुनिया में कहीं भी खेल सकता है, जबकि मेस्सी बार्सीलोना का खिलाड़ी है. इसका अर्थ यह है कि इस दोनों दिग्गज खिलाड़ियों के खेलने की शैली में जमीन-असमान का फर्क है. रोनाल्डो जहां पुर्तगाल के लिए वन मैन आर्मी की तरह खेलते हैं वहीं मेस्सी टीम सपोर्ट को तवज्जों देते हैं. हालांकि मौजूदा समय में ये दोनों फुटबॉल जगत के सबसे चहेते खिलाड़ी हैं.

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